दशहरा 2026: तारीख, विजय मुहूर्त और आज घर पर क्या करें
Dussehra 2026: date, Vijay muhurat and what to do at home today
छोटा जवाब
Dussehra 2026 यानी विजयदशमी मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को है। दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर करीब 12:50 बजे शुरू होती है और 21 अक्टूबर को दोपहर करीब 2:11 बजे तक रहती है। कुछ क्षेत्रीय पंचांग उदया तिथि के हिसाब से दशहरा 21 अक्टूबर को मानते हैं, अपने परिवार या स्थानीय मंदिर के पंचांग को प्राथमिकता दें, दोनों सही हैं। दिल्ली के लिए विजय मुहूर्त दोपहर 2:00 से 2:46 बजे के बीच है, और यह दिन साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक है, नया काम, खरीदारी या बच्चे की पहली पढ़ाई शुरू करने के लिए अलग मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं।
चरण दर चरण
सुबह उठकर स्नान करें और घर साफ़ करें। नवरात्रि के नौ दिन का समापन आज है, इसलिए घर को थोड़ा विशेष रूप से साफ़ करें।
शस्त्र और आयुध पूजा करें। अपने काम के औज़ार, किताबें, वाहन या संगीत वाद्ययंत्र, जो भी रोज़ काम आता है, उसे साफ़ करके उसके सामने एक फूल और थोड़ा कुमकुम रखें और मन से धन्यवाद करें। कुछ न हो तो सिर्फ़ हाथ जोड़कर प्रणाम काफ़ी है।
नवरात्रि का कलश जल घर में छिड़कें। जो कलश नौ दिन रखा था, उसका जल घर के हर कमरे में हल्का छिड़कें। जवारे (जौ के अंकुर) परिवार के बड़े सदस्यों को दें या कान के पीछे लगाएं, यह शुभता का प्रतीक है।
दोपहर 1:14 से 3:32 के बीच अपराजिता पूजा करें। अपराजिता देवी की पूजा इसी अपराह्न काल में होती है। घर में एक साफ़ जगह पर सफ़ेद या नीले फूल रखें, जल और कुमकुम चढ़ाएं। अगर फूल न हों तो तुलसी के पत्ते रखें।
शमी पूजा करें। शमी के पेड़ की पत्तियां लाएं या पड़ोस में हों तो वहाँ जाकर पूजा करें। यह श्लोक पढ़ें: "शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥" महाराष्ट्र और कर्नाटक में शमी या आप्टे की पत्तियां एक-दूसरे को "सोना" कहकर देने की परंपरा है।
विजय मुहूर्त में कोई नया काम शुरू करें। दोपहर 2:00 से 2:46 बजे (दिल्ली; आपके शहर में कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है), इस समय नई किताब खोलें, नया काम शुरू करें, बच्चे को पहला अक्षर लिखाएं, या कोई ज़रूरी खरीदारी करें।
शाम को रामलीला और रावण दहन देखें। अगर पास में रामलीला मैदान हो तो परिवार के साथ जाएं। घर पर हों तो दीप जलाएं और राम-नाम का स्मरण करें।
दिन में नीलकंठ पक्षी दिखे तो शुभ मानें। उत्तर भारत में इस दिन Indian roller (नीलकंठ) का दिखना बहुत शुभ माना जाता है, अगर दिखे तो मन में एक इच्छा करें।
रात को परिवार के साथ बैठें। रावण के दस सिरों का अर्थ बच्चों को बताएं, दस बुराइयां जो हम सबके भीतर होती हैं और जिन्हें जीतना असली विजयदशमी है।
क्या अर्पित करें
अपराजिता और शमी पूजा के लिए, ये चीज़ें हर रसोई में मिलती हैं:
- जल (साफ़ पानी)
- कुमकुम और हल्दी
- सफ़ेद या पीले फूल, या तुलसी के पत्ते
- अगरबत्ती या दीपक (घी या तेल)
- शमी या आप्टे की पत्तियां (न हों तो तुलसी चलेगी)
शस्त्र और आयुध पूजा के लिए:
- वह औज़ार, किताब या वाहन जो आपके काम का है
- एक साफ़ कपड़ा पोंछने के लिए
- थोड़ा कुमकुम या रोली
- एक फूल या फूल न हो तो एक तुलसी पत्ता
अगर आप ऐसे हैं
जो पहली बार घर पर कर रहे हैं
आपको किसी विशेष सामग्री की ज़रूरत नहीं है, घर में जो है उसी से शुरू करें। बस एक थाली में दीपक, कुमकुम और जल रखें, शमी का श्लोक पढ़ें, और दोपहर 2 बजे के आसपास कोई एक नया काम शुरू करें। परंपरा इरादे से बनती है, सामान से नहीं।
नौकरी वाले जिनके पास आज आधा घंटा है
सुबह काम पर जाने से पहले अपने लैपटॉप, किताब या औज़ार को एक बार साफ़ करें और हाथ जोड़ लें, यही आयुध पूजा है। लंच ब्रेक में दोपहर 2 बजे के आसपास कोई एक काम जो आप टाल रहे थे, उसे शुरू कर दें, यह दिन उसके लिए बना है।
जिनके बच्चे इसका मतलब समझना चाहते हैं
बच्चों को बताएं कि रावण बहुत विद्वान था, चारों वेद और छह शास्त्र जानता था, लेकिन एक ग़लत इच्छा उसने नहीं छोड़ी और वह हार गया। रावण के दस सिर दस बुराइयों के प्रतीक हैं जैसे क्रोध, लालच, अहंकार, और आज का दिन याद दिलाता है कि इन्हें जीतना ही असली जीत है। केरल में आज बच्चों को पहला अक्षर लिखाने की परंपरा है, आप भी बच्चे को कुछ नया सिखाने की शुरुआत आज करें।
जो विदेश में हैं और आसपास कोई रामलीला नहीं
आप घर पर ही दीपक जलाएं और रामचरितमानस या वाल्मीकि रामायण का एक अंश पढ़ें, लंका विजय का प्रसंग। विजय मुहूर्त भारतीय समयानुसार 2:00 से 2:46 बजे है, उस समय अपने शहर के हिसाब से जो भी घड़ी हो, मन में राम का स्मरण करें और कोई एक काम जो आप शुरू करना चाहते थे, उसे लिख लें, शुरुआत हो गई।
यह दिन क्यों मायने रखता है
दशहरा दो अलग-अलग विजयों को एक साथ याद करता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार इसी दिन राम ने दस सिर वाले रावण को लंका में हराया था, इसीलिए इसे "दशहरा" यानी दश-हरा कहते हैं, जिसने दस सिर वाले को हराया। दूसरी ओर, मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य के अनुसार देवी दुर्गा ने नौ दिन-रात के युद्ध के बाद महिषासुर को आज के दिन पराजित किया।
महाभारत के विराट पर्व में एक और कड़ी है। पांडवों ने अज्ञातवास के अंतिम वर्ष में अपने शस्त्र शमी के पेड़ में छुपाए थे और विजयदशमी के दिन उन्हें वापस उठाया। इसीलिए शमी पूजा इस दिन का एक ज़रूरी हिस्सा है।
रावण को सिर्फ़ खलनायक नहीं माना जाता। वह शिव का परम भक्त था और शिव तांडव स्तोत्र उसी की रचना मानी जाती है। उसके दस सिरों को दो तरह से पढ़ा जाता है, चार वेद और छह शास्त्रों की महारत, और दस मानवीय कमज़ोरियां जैसे काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर्य, स्वार्थ, अन्याय, अमानवता और अहंकार। उसका पतन इसलिए नहीं हुआ कि वह बुरा था, बल्कि इसलिए कि एक इच्छा उसने नहीं छोड़ी।
यह दिन साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक है, यानी इतना शुभ कि नया व्यापार, नई पढ़ाई, नई खरीदारी के लिए पंडित से अलग मुहूर्त निकलवाने की ज़रूरत नहीं। जो काम आप टाल रहे थे, आज शुरू कर सकते हैं।
आम सवाल
क्या बिना व्रत रखे भी दशहरा मना सकते हैं? बिल्कुल। दशहरे पर व्रत की अनिवार्य परंपरा नहीं है जैसी नवरात्रि में होती है। शमी पूजा, अपराजिता पूजा और आयुध पूजा सामान्य खाना खाते हुए भी की जा सकती है। यह उत्सव का दिन है, तपस्या का नहीं।
विजय मुहूर्त सिर्फ़ दिल्ली के लिए है, मेरे शहर में क्या होगा? दिल्ली के लिए विजय मुहूर्त करीब 2:00 से 2:46 बजे है। आपके शहर में यह कुछ मिनट आगे या पीछे हो सकता है। अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर से पूछ लें, या इसी अपराह्न काल यानी 1:14 से 3:32 के बीच कोई भी शुभ काम करें, यह पूरा समय अच्छा है।
क्या 20 या 21 अक्टूबर, कौन सा सही है? दोनों सही हैं। जो पंचांग दशमी तिथि के आरंभ को देखते हैं वे 20 अक्टूबर मानते हैं, जो उदया तिथि यानी सूर्योदय के समय की तिथि देखते हैं वे 21 अक्टूबर मानते हैं। अपने परिवार या स्थानीय मंदिर के पंचांग को मानें, दोनों श्रद्धा से चले आ रहे हैं।
बच्चों की पढ़ाई शुरू करने की परंपरा क्या सच में है? हाँ। केरल और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में इसे विद्यारंभम कहते हैं, छोटे बच्चों को इसी दिन पहला अक्षर लिखाया जाता है। यह दिन साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक होने के कारण उत्तर भारत में भी बच्चे की नई कक्षा, नई किताब या नया कोर्स शुरू करने के लिए बहुत उपयुक्त माना जाता है।
मन में कुछ भारी लग रहा है?
अपनी बात कृष्ण से कहिए — बिना किसी फ़ैसले के, बस एक सच्ची बातचीत। शुरुआत मुफ़्त।
कृष्ण से बात करें →