आत्मविश्वास

जब कोई साथ न दे, तब खुद पर भरोसा कैसे रखें | भगवद् गीता 6.5

19 सितंबर 2026·4 min read
जब कोई साथ न दे, तब खुद पर भरोसा कैसे रखें | भगवद् गीता 6.5

भगवद् गीता 6.5

उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः।।6.5।।

uddhared ātmanātmānaṁ nātmānam avasādayet ātmaiva hyātmano bandhur ātmaiva ripur ātmanaḥ

अर्थ: ।।6.5।। अपने द्वारा अपना उद्धार करे, अपना पतन न करे; क्योंकि आप ही अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है।

कृष्ण क्या कह रहे हैं

जब कृष्ण यह बात कहते हैं, तब अर्जुन एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ वह पूरी तरह टूटा हुआ है। सामने अपने ही लोग हैं, पीछे कोई रास्ता नहीं। ऐसे में कृष्ण उसे किसी और की तरफ नहीं भेजते। वे कहते हैं, पहले खुद को देखो।

इस श्लोक में दो शब्द बहुत ज़रूरी हैं। पहला है 'उद्धार', यानी खुद को ऊपर उठाना, अपनी बेहतर ज़िंदगी की तरफ ले जाना। दूसरा है 'पतन', यानी खुद को नीचे गिराना, अपनी ही सोच और आदतों से। कृष्ण साफ कह रहे हैं कि यह दोनों काम सिर्फ आप कर सकते हैं, कोई और नहीं।

सबसे काम की बात यह है कि जब कोई साथ न दे, तो यह सोचना बंद करें कि 'मुझे किसी की ज़रूरत है।' इसकी जगह एक सवाल पूछें, 'मैं आज खुद के लिए मित्र की तरह काम कर रहा हूँ या दुश्मन की तरह?' यही सवाल इस श्लोक की असली ताकत है।

यह आप पर कैसे लागू होता है

जब घरवाले आपकी पसंद के करियर के खिलाफ हों

आप जो बनना चाहते हैं, उसके लिए घर में रोज़ बहस होती है। माँ-बाप की नाराज़गी है, रिश्तेदारों के ताने हैं। इस माहौल में सबसे बड़ा खतरा यह है कि आप खुद भी शक करने लगते हैं, 'शायद वे सही हों।' यही वह पल है जब आप अपने खुद के दुश्मन बन जाते हैं।

कल सुबह एक काम करें, अपने करियर के बारे में एक छोटी सी लिस्ट बनाएँ। उसमें लिखें कि आप यह क्यों चुनना चाहते हैं, और आपने अब तक इसके लिए क्या किया है। घरवालों की राय नहीं बदलेगी तुरंत, लेकिन आपका अपने फैसले पर भरोसा मज़बूत होगा। और यही भरोसा आपको आगे ले जाएगा।

तलाक के बाद ज़िंदगी फिर से बनाते वक्त

एक रिश्ता टूटने के बाद सबसे भारी बोझ यह नहीं होता कि अकेलापन है। भारी यह होता है कि आप खुद से ही नाराज़ रहते हैं, 'मैंने कहाँ गलती की, मैं काफी नहीं था।' यह नाराज़गी आपको हर दिन थोड़ा और नीचे खींचती है।

कल सुबह उठकर एक छोटा सा काम करें जो सिर्फ आपके लिए हो, एक कप चाय चुपचाप पिएँ, थोड़ा टहलें, या कोई पुरानी पसंदीदा किताब उठाएँ। यह बड़ा कदम नहीं है, लेकिन यह एक संकेत है जो आप खुद को दे रहे हैं, कि आप अपने मित्र हैं, दुश्मन नहीं। धीरे-धीरे यही छोटे संकेत नई ज़िंदगी की नींव बनते हैं।

पहली पीढ़ी के छात्र जो अकेले पढ़ाई की राह पर हैं

घर में कोई नहीं जो कॉलेज की दुनिया समझे। न कोई बताने वाला कि फॉर्म कैसे भरें, न कोई जो समझे कि एग्ज़ाम का प्रेशर क्या होता है। आप अकेले ही सब सीख रहे हैं, और कभी-कभी लगता है कि आप गलत जगह खड़े हैं।

लेकिन यही आपकी सबसे बड़ी ताकत भी है। कल से एक आदत डालें, हर रात सोने से पहले एक चीज़ लिखें जो आपने उस दिन खुद से सीखी। किसी ने नहीं सिखाई, आपने खोजी। यह डायरी आपको याद दिलाएगी कि आप हर दिन खुद अपने रास्ते बना रहे हैं। परिवार का अनुभव नहीं है, लेकिन आपकी मेहनत है, और वह कहीं नहीं जाती।

जो किसी नए क्षेत्र में देर से शुरुआत कर रहे हैं

आप 35 या 45 की उम्र में कुछ नया सीखने बैठे हैं। आसपास सब छोटे हैं, और आपके मन में बार-बार आता है, 'बहुत देर हो गई।' यह सोच ही वह दुश्मन है जिसकी बात कृष्ण कर रहे हैं। आप खुद ही खुद को रोक रहे हैं, कोई और नहीं।

कल एक काम करें, 'देर हो गई' वाले जुमले को एक हफ्ते के लिए बाहर रखें। उसकी जगह यह पूछें, 'आज मैं इसमें दस मिनट दे सकता हूँ?' बस दस मिनट। उम्र नहीं बदलेगी, लेकिन हर दिन दस मिनट की लकीर खिंचती जाएगी, और एक दिन आप पीछे देखेंगे तो एक लंबा रास्ता बना होगा।

आज क्या करें

  1. आज रात पाँच मिनट के लिए बैठें और एक सवाल का जवाब लिखें, 'पिछले एक हफ्ते में मैंने खुद के साथ मित्र जैसा व्यवहार किया या दुश्मन जैसा?' बस ईमानदारी से लिखें, कोई जज करने वाला नहीं है।

  2. एक छोटा सा फैसला लें जो सिर्फ आपके लिए हो और जिसे आप आज ही पूरा कर सकें, चाहे वह एक फोन कॉल हो, एक पेज पढ़ना हो, या बस एक घंटे की नींद ज़्यादा लेना हो। यह अभ्यास है खुद का मित्र बनने का।

  3. जो एक काम आप लंबे समय से 'किसी और के सहारे' की उम्मीद में टाल रहे हैं, उसका पहला कदम आज उठाएँ, अकेले। सिर्फ पहला कदम, पूरा रास्ता नहीं।

आख़िरी बात

कृष्ण ने अर्जुन को यह नहीं कहा कि अकेले रहो या किसी की मदद मत लो। उन्होंने यह कहा कि अपनी ज़िम्मेदारी खुद उठाओ। जब कोई साथ न दे, तो यह दुनिया का अंत नहीं है, यह वह जगह है जहाँ से आपकी असली शुरुआत होती है। आप खुद अपने सबसे भरोसेमंद दोस्त हैं, बस एक बार इस पर यकीन करके देखिए।

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