चिंता और घबराहट कैसे दूर करें | भगवद् गीता 18.66
भगवद् गीता 18.66
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः।।18.66।।
sarva-dharmān parityajya mām ekaṁ śharaṇaṁ vraja ahaṁ tvāṁ sarva-pāpebhyo mokṣhayiṣhyāmi mā śhuchaḥ
अर्थ: ।।18.66।।सम्पूर्ण धर्मोंका आश्रय छोड़कर तू केवल मेरी शरणमें आ जा। मैं तुझे सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त कर दूँगा, चिन्ता मत कर।
कृष्ण क्या कह रहे हैं
गीता का यह आखिरी बड़ा संदेश है। अठारह अध्याय, सैकड़ों श्लोक, धर्म-अधर्म, कर्म-ज्ञान-भक्ति की पूरी बातचीत के बाद कृष्ण रुकते हैं और अर्जुन से कहते हैं, बस, अब सब छोड़ो और मेरे पास आ जाओ। अर्जुन उस वक्त युद्धभूमि में खड़ा है, भीतर से टूटा हुआ, यह सोचकर थका हुआ कि मैं सही कर रहा हूँ या गलत। वह हर फैसले का बोझ खुद उठाने की कोशिश कर रहा है।
इस श्लोक में एक शब्द है जो ध्यान देने लायक है, "शरण"। शरण का मतलब हार मानना नहीं है। शरण का मतलब है यह स्वीकार करना कि कुछ चीज़ें मेरे हाथ में नहीं हैं, और जो मेरे हाथ में नहीं है उसकी चिंता में जलते रहना बेकार है। कृष्ण यह नहीं कह रहे कि काम मत करो। वे कह रहे हैं कि नतीजे का डर अपने कंधों पर मत रखो।
आज के लिए एक काम की बात यह है, जब चिंता सबसे ज़्यादा हो, तब ज़ोर से यह मत सोचो कि "मैं इसे कैसे ठीक करूँ"। एक बार रुककर पूछो, "क्या यह सच में मेरे वश में है?" जो वश में नहीं है, उसे छोड़ने की हिम्मत ही इस श्लोक का असली संदेश है।
यह आप पर कैसे लागू होता है
परीक्षा के नतीजे से एक रात पहले
आप रात भर फोन घुमाते रहते हैं, नींद नहीं आती, बार-बार वही सवाल दिमाग में आता है, "क्या हुआ होगा?" लेकिन सोचिए, अभी इस रात आप कुछ भी बदल नहीं सकते। पेपर हो चुका, नंबर लग चुके। जो होना था, हो गया।
कल सुबह नतीजा देखने से पहले एक काम करें, पाँच मिनट चुपचाप बैठें और मन में कह दें, "मैंने जितना कर सकता था, किया। अब जो आएगा, उसे मैं सँभाल लूँगा।" यह छोटी सी बात आपको नतीजे से नहीं बचाएगी, लेकिन उसे झेलने की ताकत ज़रूर देगी।
जिसकी नौकरी डगमगा रही है
ऑफिस में छँटनी की खबरें हैं, मीटिंग में नाम नहीं आया, मैनेजर का रवैया बदला हुआ लग रहा है। आप हर ईमेल में इशारे ढूँढते हैं, हर बातचीत में छिपा मतलब खोजते हैं। यह थकान असली है, और यह चिंता भी जायज़ है।
लेकिन इस श्लोक की बात यह है कि जितनी ऊर्जा आप अनिश्चितता को सँभालने में लगा रहे हैं, उसका आधा भी अगर अगले कदम की तैयारी में लगाएँ तो आप बेहतर जगह होंगे। कल से एक छोटा काम करें, रोज़ बीस मिनट अपने काम को बेहतर करने में लगाएँ, डर को नहीं। जो होगा वह होगा, लेकिन आप तैयार रहेंगे।
नए माँ-बाप जो रात को सो नहीं पाते
बच्चा सो गया है, लेकिन आप नहीं सो पा रहे। क्या वह ठीक से साँस ले रहा है? क्या दूध कम तो नहीं हो रहा? क्या मैं अच्छा माँ-बाप हूँ? यह सवाल रात के दो बजे सबसे तेज़ आवाज़ में आते हैं।
कृष्ण का संदेश यहाँ यह है कि आप हर चीज़ काबू नहीं कर सकते, और यह आपकी कमज़ोरी नहीं है। कल रात जब यह घबराहट आए, तो खुद से एक सवाल पूछें, "अभी इस पल, क्या बच्चा सुरक्षित है?" अगर जवाब हाँ है, तो बाकी सब चिंताएँ कल की हैं। अभी के लिए बस इतना काफी है।
जो मेडिकल रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहा है
डॉक्टर ने कहा तीन दिन में रिपोर्ट आएगी। आपने तब से गूगल पर हर लक्षण खोज डाला है, हर बुरी संभावना मन में बन चुकी है। यह इंतज़ार शायद सबसे भारी होता है क्योंकि इसमें आप कुछ कर भी नहीं सकते।
यही वह जगह है जहाँ यह श्लोक सबसे सीधे काम आता है। रिपोर्ट आने तक आप नतीजा नहीं बदल सकते, लेकिन इन तीन दिनों को कैसे जीते हैं, यह आपके हाथ में है। एक काम करें, रिपोर्ट से जुड़ी हर खोज बंद करें और किसी एक ऐसे काम में वक्त लगाएँ जो आपको अच्छा लगता है। यह भागना नहीं है, यह अपना ख्याल रखना है।
आज क्या करें
एक कागज़ पर अपनी सबसे बड़ी चिंता लिखें और उसके सामने लिखें, "क्या यह मेरे वश में है?" अगर नहीं, तो उस कागज़ को मोड़कर रख दें और आज के लिए उसे वहीं छोड़ दें।
आज रात सोने से पहले पाँच मिनट के लिए फोन बंद करें और बस यह एक बात मन में दोहराएँ, "मैंने आज जो कर सकता था, किया। बाकी मेरे हाथ में नहीं है।"
किसी एक भरोसेमंद इंसान को फोन करें और सिर्फ यह कहें कि आप थोड़े परेशान हैं। कुछ सुलझाने की ज़रूरत नहीं, बस कह देना भी बोझ हल्का करता है।
आख़िरी बात
चिंता इसलिए नहीं आती कि आप कमज़ोर हैं। चिंता इसलिए आती है क्योंकि आप बहुत कुछ अकेले उठाने की कोशिश कर रहे हैं। कृष्ण ने अर्जुन से यही कहा था, सब धर्म, सब हिसाब, सब बोझ एक तरफ रखो और बस मेरे पास आ जाओ। आपके लिए इसका मतलब है कि हर चीज़ का जवाब खुद ढूँढने की ज़िद छोड़ो। कुछ चीज़ें समय पर खुद सुलझती हैं, बशर्ते आप उन्हें सुलझने दें।
मन में कुछ भारी लग रहा है?
अपनी बात कृष्ण से कहिए — बिना किसी फ़ैसले के, बस एक सच्ची बातचीत। शुरुआत मुफ़्त।
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