भगवद् गीता

दबाव में शांत कैसे रहें | भगवद् गीता 2.48

19 सितंबर 2026·4 min read
दबाव में शांत कैसे रहें | भगवद् गीता 2.48

भगवद् गीता 2.48

योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।।2.48।।

yoga-sthaḥ kuru karmāṇi saṅgaṁ tyaktvā dhanañjaya siddhy-asiddhyoḥ samo bhūtvā samatvaṁ yoga uchyate

अर्थ: ।।2.48।। हे धनञ्जय ! तू आसक्तिका त्याग करके सिद्धि-असिद्धिमें सम होकर योगमें स्थित हुआ कर्मोंको कर; क्योंकि समत्व ही योग कहा जाता है।

कृष्ण क्या कह रहे हैं

अर्जुन कुरुक्षेत्र के मैदान में खड़ा है। सामने अपने ही लोग हैं, हाथ-पैर कांप रहे हैं, धनुष छूट गया है। वह सोच रहा है कि अगर जीते तो क्या मिलेगा, अगर हारे तो क्या खोएगा। यही उसकी तकलीफ की जड़ है। कृष्ण यहाँ रुककर उससे कहते हैं कि तू काम कर, लेकिन सिद्धि और असिद्धि दोनों में एक जैसा रह।

सिद्धि का मतलब है सफलता, असिद्धि का मतलब है असफलता। और समत्व का मतलब है दोनों के सामने एक ही भाव रखना, न ज़्यादा उछलना, न ज़्यादा टूटना। आसक्ति यानी नतीजे से चिपकना, यही वह चीज़ है जो हमें काम करते वक्त हिला देती है। कृष्ण कह रहे हैं कि इस चिपकन को छोड़ो, और जो करना है वह पूरे ध्यान से करो।

आज के लिए एक बात: जब भी कोई काम करने बैठें, तो एक पल रुककर खुद से पूछें कि मैं अभी नतीजे की चिंता कर रहा हूँ या काम पर ध्यान दे रहा हूँ। बस यही एक सवाल आपको उस समत्व की तरफ ले जाएगा जिसकी बात कृष्ण कर रहे हैं।

यह आप पर कैसे लागू होता है

एक घंटे में प्रेज़ेंटेशन देनी है

आप अभी स्लाइड्स देख रहे हैं, मन में बार-बार आ रहा है कि अगर बॉस को पसंद नहीं आई तो? अगर कोई सवाल पूछ दिया जिसका जवाब नहीं पता? यह डर असल में नतीजे से आसक्ति है, और यही आपकी तैयारी को कमज़ोर कर रहा है।

कल सुबह जब अगली बार ऐसी कोई बात हो, तो खुद से कहें कि मेरा काम है अच्छे से समझाना, बाकी उनका फैसला है। इससे प्रेज़ेंटेशन की तैयारी नहीं बदलेगी, लेकिन आवाज़ की कंपकंपी और दिमाग का भटकाव ज़रूर कम होगा। काम वही रहेगा, दबाव हल्का हो जाएगा।

शिफ्ट के बीच में डॉक्टर या नर्स

आप घंटों से खड़े हैं, एक मरीज़ की हालत अचानक बिगड़ी, और दिमाग में यह भी चल रहा है कि अगर कुछ गलत हो गया तो। यह दोहरा बोझ आपको उस पल से खींचकर दूर ले जाता है जहाँ आपकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

गीता का समत्व यहाँ यह कहता है कि अगला कदम क्या है, बस उस पर रहो। नतीजा आपके हाथ में पूरी तरह नहीं है, लेकिन अगला सही फैसला आपके हाथ में है। कल शिफ्ट में जब भी मन भागे, एक सांस लें और सिर्फ अगले पाँच मिनट का काम देखें। इतना काफी है।

घर में कोई मुश्किल घड़ी आई है

बच्चा बीमार है, या घर में कोई बड़ा झगड़ा हो गया है, या पैसों की अचानक तंगी आ गई है। आप एक साथ सब सँभालने की कोशिश में खुद बिखर रहे हैं। मन में है कि यह ठीक होगा या नहीं, और इसी सोच में आप वह नहीं कर पा रहे जो अभी करना ज़रूरी है।

समत्व का मतलब यह नहीं कि आप परवाह न करें। मतलब यह है कि घबराहट को किनारे रखकर एक-एक काम उठाएं। कल जब ऐसा कोई पल आए, तो पहले एक छोटा काम पूरा करें जो हो सकता है। उससे जो राहत मिलेगी, वह अगला कदम उठाने की ताकत देगी। पूरी समस्या एक साथ हल नहीं होगी, लेकिन आप टूटेंगे नहीं।

नौकरी का इंटरव्यू है

आप इंटरव्यू रूम के बाहर बैठे हैं। मन में चल रहा है कि यह नौकरी मिली तो ज़िंदगी बदल जाएगी, नहीं मिली तो क्या होगा। यह सोच आपको वहाँ ले जाती है जो अभी हुआ नहीं है, और आप उस कमरे में घुसते ही अपना सबसे अच्छा नहीं दे पाते।

गीता यहाँ कहती है कि नौकरी मिलेगी या नहीं, यह नतीजा है। आपका काम है कि अगले आधे घंटे में जो पूछा जाए उसका ईमानदार और साफ जवाब दें। कल अगर फिर ऐसा मौका आए, तो बाहर बैठकर खुद से कहें कि मेरा काम है अच्छे से बात करना। चुनाव उनका है, तैयारी मेरी है। इससे आवाज़ स्थिर रहेगी और जवाब भी बेहतर निकलेगा।

आज क्या करें

  1. अगला कोई भी काम शुरू करने से पहले दस सेकंड रुकें और खुद से पूछें कि मैं अभी नतीजे की चिंता कर रहा हूँ या काम पर हूँ। बस यह सवाल पूछना शुरुआत है।

  2. आज किसी एक काम को पूरी तरह खत्म करें बिना यह सोचे कि लोग क्या कहेंगे या क्या होगा। देखें कि काम करते वक्त कैसा लगता है जब नतीजे की चिंता नहीं होती।

  3. रात को सोने से पहले एक मिनट के लिए सोचें कि आज किस काम में आप सच में मौजूद थे और किसमें नहीं। यह छोटी सी आदत धीरे-धीरे समत्व को असली बना देती है।

आख़िरी बात

दबाव हमेशा रहेगा, वह कम नहीं होगा। लेकिन जिस दिन आप नतीजे से थोड़ा हटकर काम पर आ जाते हैं, उस दिन दबाव आपको हिला नहीं पाता। समत्व कोई बड़ी साधना नहीं है, यह बस एक छोटी सी पसंद है जो हर काम से पहले की जा सकती है। कृष्ण ने यह बात मैदान में कही थी, आप इसे आज अपनी मेज़ पर काम आ सकते हैं।

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