मातृ नवमी

माँ का श्राद्ध किस दिन है? मातृ नवमी का पूरा अर्थ

26 सितंबर 2026·5 min read
माँ का श्राद्ध किस दिन है? मातृ नवमी का पूरा अर्थ

माँ का श्राद्ध किस दिन है? मातृ नवमी का पूरा अर्थ

छोटा जवाब

माँ का श्राद्ध मातृ नवमी को होता है, जो 2026 में 5 अक्टूबर है। यह दिन खासतौर पर माँ के लिए और परिवार की उन सभी विवाहित महिलाओं के लिए है जो चली गई हैं। अगर माँ की मृत्यु की तिथि याद नहीं है, तो भी इसी दिन श्राद्ध करना सही माना जाता है। घर पर पानी, काले तिल और एक दीपक से भी यह हो सकता है, किसी पंडित को बुलाना ज़रूरी नहीं। और अगर किसी कारण 5 अक्टूबर न हो पाए, तो 10 अक्टूबर सर्व पितृ अमावस्या पर सभी के लिए श्राद्ध किया जा सकता है।


चरण दर चरण

  1. सुबह जल्दी उठें, स्नान करें। इस दिन साफ़ कपड़े पहनें, सफ़ेद या हल्के रंग के। कोई नया या चमकीला कपड़ा न पहनें।

  2. एक थाली तैयार करें। उसमें थोड़ा पानी, काले तिल और एक दीपक रखें। काले तिल न हों तो सफ़ेद तिल भी चलेंगे।

  3. दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके खड़े हों। हाथ में पानी और तिल लेकर माँ का नाम लेते हुए तर्पण दें, यानी धीरे-धीरे पानी ज़मीन पर छोड़ें। तीन बार करें।

  4. खाना बनाएँ जो माँ को पसंद था। जो भी घर में बने, दाल, चावल, रोटी, खीर, वही ठीक है। तामसिक चीज़ें यानी प्याज़, लहसुन, माँस इस दिन न बनाएँ।

  5. खाने का पहला हिस्सा अलग निकालें। यह हिस्सा कौवे के लिए, गाय के लिए या कुत्ते के लिए रखें। इन्हें पितरों का प्रतीक माना जाता है।

  6. एक व्यक्ति को भोजन कराएँ। कोई भी हो सकता है, पड़ोसी, ज़रूरतमंद, या घर का कोई बड़ा। यही इस दिन का सबसे ज़रूरी काम है।

  7. शाम को दीपक जलाएँ और माँ को याद करें। कोई मंत्र याद न हो तो बस मन में उनसे बात करें। यह श्राद्ध आपका अपना काम है, दिल से किया हुआ।


क्या अर्पित करें

तर्पण के लिए, ये चीज़ें हाथ में लेकर जल अर्पित करें:

  • काले तिल (न हों तो सफ़ेद तिल)
  • साफ़ पानी, तांबे के लोटे में हो तो अच्छा
  • कुश घास, अगर मिले तो; न मिले तो सिर्फ़ पानी और तिल काफ़ी हैं

भोग के लिए, माँ के नाम पर अलग निकालें:

  • दाल-चावल या जो भी घर में बना हो
  • खीर या गुड़, मीठा ज़रूर रखें अगर हो सके
  • पानी का एक कटोरा
  • एक दीपक (सरसों या घी का)

अगर आप ऐसे हैं

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आप बिल्कुल सही जगह हैं। श्राद्ध का मतलब किसी विधि को परफेक्ट करना नहीं है, मतलब है याद करना। दक्षिण दिशा में मुँह करके माँ का नाम लें, पानी और तिल से तर्पण दें, एक दीपक जलाएँ और किसी को खाना खिलाएँ, बस इतना काफ़ी है।

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सुबह नहाकर दक्षिण दिशा में खड़े हों, हाथ में पानी और तिल लेकर तीन बार तर्पण दें, और खाने का एक हिस्सा कौवे या कुत्ते के लिए बाहर रख दें। शाम को घर आकर एक दीपक जलाएँ और किसी को भी, चाहे चाय-बिस्कुट ही सही, खिलाएँ। दिन भर का काम पूरा हो जाता है।

जो विदेश में हैं और आ नहीं सकते

आप जहाँ हैं वहीं यह हो सकता है। सुबह नहाएँ, दक्षिण दिशा में मुँह करें, एक गिलास पानी में तिल डालकर धीरे-धीरे ज़मीन पर या किसी पौधे की जड़ में छोड़ें। उस दिन किसी को खाना खिलाएँ या किसी ज़रूरतमंद को कुछ दें, यह भी उतना ही मान्य है।

वह बेटी जिससे घरवाले कहते हैं कि यह उसका काम नहीं

शास्त्र में ऐसा कोई नियम नहीं है जो बेटी को माँ का श्राद्ध करने से रोके। यह आपकी माँ हैं, और यह आपका अधिकार है। अगर घर में विवाद न चाहती हों, तो अपने कमरे में या छत पर चुपचाप दीपक जलाएँ, पानी और तिल से तर्पण दें, और मन में माँ को याद करें, यह श्राद्ध पूरा है।


यह दिन क्यों मायने रखता है

पितृ पक्ष के पंद्रह दिनों में हर तिथि किसी न किसी के लिए है। नवमी का दिन, मातृ नवमी, खास इसलिए है क्योंकि इसे परंपरागत रूप से माँ और परिवार की स्त्रियों के लिए रखा गया है। यह सिर्फ़ एक रस्म नहीं, बल्कि एक मौका है कि हम उनके जाने के बाद भी उनसे जुड़े रहें।

इस पक्ष की मान्यता है कि पितर, यानी जो चले गए हैं, इन पंद्रह दिनों में हमारे करीब होते हैं। हम जो भी उनके नाम पर करते हैं, वह उन तक पहुँचता है। इसीलिए कौवे को खाना देना इतना ज़रूरी माना जाता है, कौवे को पितरों का दूत कहा जाता है।

माँ की तिथि याद न हो, यह बहुत आम बात है। इसीलिए मातृ नवमी को यह छूट दी गई है कि जिन्हें तिथि नहीं पता, वे भी इसी दिन श्राद्ध करें। और अगर यह दिन भी न हो पाए, तो 10 अक्टूबर की सर्व पितृ अमावस्या सबके लिए है, कोई भी उस दिन से वंचित नहीं रहता।

यह दिन किसी को दोषी महसूस कराने के लिए नहीं है। जितना हो सके, उतना करें, एक दीपक, एक गिलास पानी, एक याद। माँ के लिए यही काफ़ी है।


आम सवाल

क्या बिना व्रत रखे भी श्राद्ध हो सकता है? हाँ, बिल्कुल। श्राद्ध के लिए व्रत रखना ज़रूरी नहीं है। आप सामान्य रूप से खाना खाएँ, बस प्याज़-लहसुन और माँस उस दिन न लें, और माँ के नाम पर तर्पण और भोजन दान करें।

अगर माँ की मृत्यु की तिथि याद नहीं तो क्या करें? मातृ नवमी यानी 5 अक्टूबर 2026 को श्राद्ध करें, यह दिन खास इसी स्थिति के लिए है। अगर यह भी न हो पाए, तो 10 अक्टूबर सर्व पितृ अमावस्या पर करें। दोनों में से कोई एक दिन काफ़ी है।

क्या बेटी या घर की महिला श्राद्ध कर सकती है? हाँ, कर सकती है। परंपरा में अलग-अलग मत हैं, लेकिन कोई शास्त्र बेटी को माँ का श्राद्ध करने से नहीं रोकता। यह आपकी माँ हैं और यह आपका काम भी उतना ही है।

क्या 2026 में द्वादशी का अलग दिन है? नहीं। 2026 में द्वादशी को अपना अलग सूर्योदय नहीं मिलता, इसलिए द्वादशी का श्राद्ध 7 अक्टूबर को एकादशी के साथ ही किया जाएगा। ज़्यादातर कैलेंडर में यह नहीं लिखा होगा, इसलिए इस बात का ध्यान रखें।


अपने घर का दिन निकालिए। श्राद्ध उस तिथि को होता है जिस दिन वे गए थे, तारीख़ से नहीं — इसलिए हर साल दिन बदलता है। तारीख़ डालिए, Ask Kanha बता देगा कि इस पितृ पक्ष में वह किस दिन पड़ता है, और उस सुबह घर पर क्या करना है। मुफ़्त है।

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